खाद्य सुरक्षा

1.खाद्य सुरक्षा: अर्थ- खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार वह स्थिति है जिसमें प्रत्येक समय  परिवार के प्रत्येक सदस्यों की       पर्याप्त मात्रा में  खाद्य पदार्थों के प्रति भौतिक व आर्थिक पहुंच हो  तथा भविष्य में इस पर कोई खतरा ना हो|
2.खाद्य समस्या के पहलू
i.परिमाणात्मक पहलू- 1950 से दो 2007 के बीच खाद्य उत्पादन जनसंख्या की तुलना में 2 -5 प्रतिशत            औसत वार्षिक दर से बढ़ा है |भारत इस सन्दर्भ में आत्मनिर्भर हो गया है |
खाद्यान्न उपलब्धता= 412 ग्राम/  दिन/ व्यक्ति
दाल उपलब्धता= 6 ग्राम/ दिन
ii.गुणात्मक स्वरूप- जनसाधारण को खाद्यान्न कम गुणवत्ता वाले प्राप्त होते हैं
कैलोरी -आदर्श स्थिति 3000 ,वास्तविक दो हजार से कम
प्रोटीन का 85% तथा  विटामिन सी व डी का नगण्य  अनुपात ही मिल पाता है
iii. वितरणात्मक  पक्ष-  कृत्रिम कमी
पीडीएस की विफलता
iv.आर्थिक पक्ष- भारत में गरीबी व बेरोजगारी के कारण क्रय शक्ति  की निम्न स्थिति,
जनसंख्या की अधिकता,  निम्न उत्पादन

खाद्य समस्या का कारण-
1. जनसंख्या वृद्धि
2. प्राकृतिक आपदा
3. फसलों की क्षति
4. उपभोग प्रवृत्ति में परिवर्तन- मोटे अनाजों के उपभोग के प्रति उदासीनता
5. जमाखोरी
6. कृषि का पिछड़ापन- उत्पादकता एवं सिंचाई सुविधाओं का अभाव
7. निर्धनता
8. प्रभावी खाद्य नीति का  अभाव

उपाय-
1. कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए पस्चगामि एवं अग्रगामी  लिंकेज को मजबूत बनाना
2. खाद्यान्नों का आयात
3. अन्न  का अपव्यय रोकना- 23% खाद्यान्नों का अपव्यय हो जाता है
4. जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण
5. खाद्यान्नों की खरीद स्टोरेज व वितरण को सुधारना

फूड सिक्योरिटी एक्ट

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